
मेघनगर में सुबह से ही शुरू हुआ मित्रता दिवस की बधाईयो का सिलसिला
मित्रता आज की नहीं बल्कि पौराणिक काल से चली आ रही है। जीवन में जितना जरूरी मित्र का होना है उससे भी ज्यादा जरुरी होता है एक अच्छे मित्र का होना। मित्र वो, जो कि हमेशा अपके साथ और आपके हितों के बारे मे सोचे। मित्र वो, जो आपकी पीठ पीछे भी आपका रहे, मित्र वो, जो आपकी बुराइयों को खत्म करे, सही और गलत में आपको हमेशा सही रहा को दिखाए।
हमें हमेशा ऐसा ही मित्र बनाना चाहीये, इसकी प्रेणना हमे पौंराणिक काल से चली आ रही मित्रता से लेनी चाहीये। आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही मित्रों के बारे में, जिनकी दोस्ती के उदाहरण आज भी दिए जाते हैं। आइए जानते हैं कुछ ऐसी ही दोस्ती के उदाहरण…
कृष्ण और सुदामा
आप सभी ने कृष्ण और सुदामा की दोस्ती के बारे में सुना होगा, वे दोनों बचपन के दोस्त थे और गुरुकुल में भी साथ ही रह कर शिक्षा प्राप्त की थी। इसके बाद श्रीकृष्ण जी व्दारका के राजा बन गऐ। सुदामा का जीवन गरीबी में ही गुजरा और एक दिन सुदामा की पत्नी ने उनसे अपने मित्र के पास जा कर कुछ मदद का आग्रह करने को कहा। इसके बाद वह जाते हैं और श्रीकृष्ण से मिलते हैं। सुदामा को देख कर ही श्रीकृष्ण जी उनको गले से लगा लेते हैं और उनको अपने महल के अंदर ले कर जाते हैं और अपने राजसिंहासन पर बैठा कर उनके पैर धोतें हैं और उनका ऐसा स्वागत सतकार करते हैं। यह सब देख कर सभी हैरान हो जाते हैं कृष्ण की यह उदारता देख सुदामा उनसे कुछ ना मांग सके और वहां से वापस आ जाते हैं। लेकिन जब वे अपने घर की ओर जाते हैं तो देखते हैं कि श्रीकृष्ण की कृपा से वह पूर्णं रूप से धन.धान्य से सम्पन हो जाते हैं।






