मेघनगर ने खोया जनसेवा का प्रहरी: राजेन्द्र श्रीवास्तव (नीरज) पंचतत्व में विलीन, अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
रितिक शर्मा/जयेश झामर


मेघनगर। झाबुआ जिले के मेघनगर गांव ने आज अपने एक ऐसे सपूत को खो दिया, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन असहाय, लाचार, बेबस, मानसिक रूप से विक्षिप्त, भूले-भटके और जरूरतमंद लोगों की सेवा को समर्पित कर दिया। समाजसेवी राजेन्द्र श्रीवास्तव (नीरज) के निधन से नगर सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर व्याप्त है।
साधारण जीवन जीने वाले राजेन्द्र श्रीवास्तव गांव में 6×8 की छोटी सी दूध की दुकान संचालित कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे, जहां पैकेट वाला दूध, बिस्किट, गोली-चॉकलेट बेचकर आजीविका चलाते थे। लेकिन उनका असली परिचय उनकी दुकान नहीं, बल्कि उनकी मानवता और सेवा भावना थी।
उन्होंने विगत 20 वर्षों से अधिक समय तक निरंतर समाजसेवा करते हुए 500 से अधिक भूले-भटके लोगों को सोशल मीडिया के माध्यम से उनके घर-परिवारों से मिलवाया तथा अनेक जरूरतमंदों का उचित आश्रमों एवं संस्थाओं में पुनर्वास कराया। वे ऐसे लोगों के बाल कटवाते, स्नान करवाते, नए वस्त्र पहनाते, भोजन की व्यवस्था करते और उपचार भी करवाते थे।राजेन्द्र श्रीवास्तव रक्तदान सेवा से भी जुड़े रहे। उनके सोशल ग्रुप के माध्यम से प्रसूता माताओं एवं थैलेसीमिया पीड़ितों को प्राथमिकता देते हुए 3000 यूनिट से अधिक रक्त की व्यवस्था करवाई गई। इसके साथ ही वे विगत 20 वर्षों से लावारिस एवं असहाय लोगों के अंतिम संस्कार का पुण्य कार्य भी करते रहे।वे स्वयं देहदान के संकल्प से जुड़े थे और समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य भी निरंतर करते रहे।उनकी सेवाओं को अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया, जिनमें वर्ल्ड ग्रेटेस्ट रिकॉर्ड (2022), कल्कि गौरव सम्मान (2023), जिला गौरव रत्न सम्मान (2023), 26 जनवरी 2023 को जिला प्रशासन द्वारा उत्कृष्ट सामाजिक कार्यकर्ता सम्मान, रोटरी इंटरनेशनल सम्मान, लायंस क्लब सम्मान तथा राष्ट्रीय सेवा सम्मान, मधुबनी (बिहार) प्रमुख हैं।उनके निधन की खबर मिलते ही नगर सहित आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई। अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। उनकी अंतिम यात्रा में जनसैलाब देखने को मिला। नगर के युवा बड़ी संख्या में शामिल हुए और नम आंखों से अपने प्रिय समाजसेवी को अंतिम विदाई दी। जगह-जगह लोगों ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
राजेन्द्र श्रीवास्तव (नीरज) का जाना केवल एक व्यक्ति का निधन नहीं, बल्कि समाजसेवा के एक युग का अंत माना जा रहा है। उनकी सेवा, समर्पण और मानवता की मिसाल आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।





