अपनी परम्परा को जानना जरूरी है जो गुरुदेव के द्वारा रचित साहित्य से संभव होगा
रितिक शर्मा/जयेश झामर

मेघनगर! जिस प्रकार सभी धर्म अपने अपने साहित्य के आधार पर चलते है वैसे ही जैन धर्म भी आगमो के आधार पर चलता है आगमो के आधार पर पूज्य आचार्य भगवंत श्री उमेश मुनीजी म.सा. ने साहित्य की रचना की है जिसकी पुस्तकों का प्रकाशन पूज्य नंदाचार्य साहित्य समिति के नाम से मेघनगर मे स्थापित है पूज्य गुरुदेव के द्वारा रचित पुस्तकों को एक बार अवश्य पढ़ना चाहिये क्योकि इसमें नय का सुन्दर प्रयोग किया गया है संसार मे एक बात दो दृष्टि से लगती है एक सही तो दूसरी गलत उसे कैसे समझना ये हम गुरुदेव के द्वारा प्राप्त खजाने से समझ सकते है आगम के प्रति भक्ति पैदा करने वाला पूज्य गुरुदेव का साहित्य है उक्त धर्म उपदेश रविवार को पूज्य नंदाचार्य साहित्य समिति की आवश्यक बैठक मे आये विभिन्न प्रांतो के प्रतिनिधियों को अनुस्वाध्याय भवन मे उपस्थित धर्मसभा मे पूज्य धर्मेंद्र मुनीजी म.सा. ने फरमाया उठो बड़ो लक्ष्य की ओर अनु संदेश सुहाना आगाम भक्ति पैदा करने वाला गुरु देव का साहित्य खजाना मेघनगर से पूरे विश्व मे प्रसारित किया जा रहा है
बच्चो को धार्मिक संस्कार प्रदान करने के उद्देश्य से बाल मेले का आयोजन किया गया जिसमे बच्चों द्वारा पाठशाला की उपस्थिति से इकट्ठा अनु मुद्रा से लिया गया पूरे बाल मेले के आयोजन का संचालन अनु पाठशाला के संचालक मंडल एवं श्री धर्मदास स्थानकवासी श्रावक संघ द्वारा की गया
पुरे विश्व मे अपने साहित्य प्रदान करने वाली पूज्य नंदाचार्य साहित्य समिति मेघनगर की आवश्यक मीटिंग मे सर्वानुमति से अध्यक्ष देवेंद्र गादिया इंदौर को चुना गया एवं पूज्य धर्मदास जैन युवा मंडल के कार्यकारणी अध्यक्ष दिवंगत मनीष जी काठेड़ को श्रद्धांजलि अर्पित की गई उक्त जानकारी पंकज वागरेचा द्वारा प्रदान की गई






