पर्यावरणीय स्वीकृति हेतु लोक सुनवाई आयोजित की गई
प्रबंधन ने कहा-इकाई से प्रदूषण की संभावना नही,स्थानीय को मिलेगा लाभ -जेडब्ल्यूएस प्राइवेट लिमिटेड

मेघनगर! सोमवार को मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा मेसर्स एस.एम.ओ. फेरो अलॉय प्रा.लि. के फेरो अलॉय प्लांट विस्तार से लेकर कई नवीन उद्योग हेतु पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए लोक सुनवाई का आयोजन किया गया था। व्यापक प्रचार-प्रसार ना होने के चलते लोक सुनवाई अपने तय समय से दो घंटे देरी से शुरू हुई। लोक सुनवाई में भारत सरकार के नोडल और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इंदौर के क्षेत्रीय अधिकारी श्रीनिवास द्विवेदी मौजूद रहे।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) की ओर से लोक सुनवाई की घोषणा के बाद एस.एम.ओ. फेरो के कंसलटेंट अनुराग त्रिपाठी ने पावर पाइंट – प्रेजेंटेशन के माध्यम से कारखाना विस्तार को लेकर जानकारी दी। इस दौरान शहर के लोगों ने औद्योगिक इकाईयों द्वारा फैलाए जा रहे प्रदूषण को लेकर पीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी और जिला प्रशासन के जिम्मेदार अफसरों को मंच पर मौजूद एसडीएम के सामने जमकर खरी खोटी सुनाते हुए गंभीर आरोप लगाए। क्षेत्रीय अधिकारी श्री द्विवेदी ने कहा कि उनके क्षेत्राधिकार में 8 जिले आते हैं किंतु सर्वाधिक प्रदूषण की शिकायत और समस्या – मेघनगर से आ रहे है, जिसके चलते वे यहां विशेष रूचि लेकर माह में दो बार दौरा कर कारखाना संचालकों को सख्ती से नियमों का पालन करवाने में जुटे हैं। उन्होंने कहा कि विभाग के पूर्ववर्ती जिम्मेदारों के इतर उन्होंने यहां जनवरी 2025 में चार्ज लिया है।
मेघनगर औद्योगिक क्षेत्र के लोक सुनवाई में जनता ने रखा पक्ष
एस.एम.ओ. फेरो अलॉय प्रा. लि. के कार्य विस्तार को लेकर आयोजित लोक सुनवाई के दौरान रहवासियों ने पूर्ववर्ती केमिकल कारखानों के चलते हो रहे जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण और भूमि प्रदूषण के चलते अधिकांश लोगों ने प्रदूषण फैलाने वाले किसी भी उद्योग को अनुमति न दिए जाने की बात कहीं। किसानों की संस्था बहुउद्देषीय सहकारी समिति मेघनगर के अध्यक्ष और अगराल के किसान दिनेष पाटीदार ने कहा कि 1984 में सरकार ने औद्योगिक विकास के नाम पर किसानों से उनकी खेती की जमीन ले ली और अब उद्योग के नाम पर उनकी हवा, पानी, जमीन को खराब कर दिया। औद्योगिक प्रदूषण के बढ़ते प्रभाव के कारण ना सिर्फ पर्यावरण को नुकसान हो रहा है बल्कि मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकुल असर पड़ रहा है। उन्होंने रोजगार आधारित उद्योगों को स्वागत करने और प्रदुषण फैलाने वाले उद्योग पर आपत्ति दर्ज कराई। पर्यावरणवीद नीरज श्रीवास्वत ने कहा कि प्रदुषण विभाग के पास मेघनगर में वायु प्रदुषण नापने की कोई प्रणाली ही नहीं है। यहां पीसीबी को कोई स्थाई अधिकारी कर्मचारी भी तैनात नहीं है जो कथित कारखानों द्वारा फैलाये जा रहे प्रदुषण पर नियमित निगरानी रख सके ऐसे में कैसे प्रदुषण नियंत्रित होगा। कुछ कारखाना संचालक अपनी मर्जी से कभी दिन तो कभी रात में अपने कारखानों से इतना धुआ और गैस छोड़ते है जिससे कभी-कभी तो औद्योगिक क्षेत्र के मध्य से जा रहे रतलाम-झाबुआ स्टेट हाईवे पर दिन में वाहनों चालकों को हेड लाईट जला कर निकलना पडता है। अरुण ओहरी ने लोक सुनवाई में संबंधित कारखाने में काम करने वाली अधिकांष अषिक्षित आदिवासी वर्ग की महिलाओं को जनता के रूप में प्रस्तुत करने पर आपत्ति ली। उन्होंने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण की तमाम शिकायतों के बाद भी पीसीबी और जिला प्रशासन द्वारा संबंधित कारखानों के खिलाफ कार्यवाही नहीं होती जिससे क्षेत्र का भूजल भी खराब हो चुका है।केमिकल और फर्टिलाइजर कारखानों को नियमों का पालन न करने पर सतत नोटिस दे कर उनके फैलाए जा रहे प्रदूषण की रोकथाम हेतु निर्देशित किया जा रहा है। द्विवेदी ने बताया कि मेघनगर में ट्रेंट केमिकल प्राईवेट लिमिटेड, राठौर फार्मा जैसे कारखानों को क्लोजर नोटिस जारी किये जा चुके हैं, कुछ और कारखानों को क्लोजर दिए जाने की प्रक्रिया जारी है जिसमें ब्रोमोस केमिकल प्रा.लिमीटेड शामिल है। ध्वनि प्रदूषण के लिए कृष्णा फास्टेक का दौरा किया है उसे सुधारने के लिए कहा गया है।केमिकल कारखानों में विनी इंडस्ट्री, सिद्धि विनायक केमिकल, अंकिता जैसे कई कारखानों को इंदौर और भोपाल स्तर पर नोटिस जारी किये हैं, यदि इन कारखानों द्वारा जन भावना के साथ खिलवाड़ करना बंद नहीं किया तो उनके खिलाफ क्रिमिनल केस दायर किया जायेगा। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन और एसडीएम भी पब्लिक न्यूसेंस के तहत प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ कार्यवाही करे इसके लिए वे संभाग आयुक्त और कलेक्टर से भी चर्चा करेंगे।
द्विवेदी ने अपने मोबाईल नंबर सार्वजनिक कर लोगो से अपील की
उन्होंने कहा कि किसी कारखाने को बंद करना अंतिम विकल्प होता है। सरकार की नीति और तय मापदंड के अनुसार उद्योगपतियों को अपने कारखाना संचालित कराना चाहिए। किसानों की बात से इत्तेफाक रखते हुए उन्होंने कहा कि वे स्वयं एक किसान परिवार से आते हैं ऐसे में किसानों की तकलीफ समझ सकते है, प्रदूषण नियंत्रण करने के लिए सख्ती से कार्यवाही का भरोसा उन्होंने मौजूद लोगों को दिलाया।
लाल पानी लेकर पहुंचे-मौका एस.एम.ओ. फेरो अलॉय के कार्य विस्तार और नवीन इकाइयों की स्थापना की पर्यावरणीय स्वीकृक्ति हेतु दावे/आपत्ति और सुझाव को था किंतु लोगों में प्रदूषण को लेकर इतना गुस्सा था कि वे अपनी बात को संबंधित विभाग के जिम्मेदार के सामने रखना चाहते थे। नगर के वेद प्रकाश बसेर अपने साथ लाल पानी से भरी बाल्टी लेकर पहुंचे, ये पानी तारकेश्वर महादेव मंदिर के बोरिंग का है। बसेर ने कहा कि विभागीय अधिकारियों के संज्ञान में सारी जानकारी होने के बाद कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है। इस पर क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी ने नियमों का हवाला दिया और नोटिस पर सुधार ना होने पर कार्यवाही की बात कहीं।
नगर के मनीष नाहटा ने कंपनी द्वारा प्रस्तुत प्रजेंन्टेषन में अपर्याप्त पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन की बात कहते हुए विस्तार पर आपत्ति दर्ज कराई। कंपनी के प्रस्तावित 300 प्रतिशत उत्पादन वृद्धि में ईकएआई रिपोर्ट में समुचित विश्लेषण नहीं किया।
स्थानीय रोजगार पर भी बात रखते हुए पूर्व पार्षद अनुप भंडारी द्वारा नविन इकाइयो मे स्थानीय कर्मचारियों को रोजगार मिले इस और ध्यान केंद्रित किया
लोक संवाद के अंत एक ज्वलित समस्या अधिकारी के समक्ष अभिभाषक जयेश झामर द्वारा रखी गई जिसमे बताया गया थांदला-झाबुआ हाइवे मार्ग पर मध्य भारत फेक्ट्री के मुख्य मार्ग के सामने से लगभग लंबी दूरी तक फेक्ट्री का अपयिष्ठ प्रदार्थ यहा से निकलने वाले लोडिंग वाहनों से सड़को पर बिखरता है जिससे आये दिन राहगीरों एवं गुजरने वाले वाहनों को दुर्घटना भय रहता है जिस पर प्रदूषण अधिकारी द्वारा मोके पर पहुँच कर मध्य भारत प्रभारी को चेतावनी दे कर तीन दिवस का समय दिया और उचित व्यवस्था का हवाला देते हुए भविष्य मे मार्ग पर स्वछता बनाये रखने का मौखिक आदेश दिया





