
जिले के ग्रामीणों का हो रहा भरपुर शोषण, खुल कर हो रहा भ्रष्टाचार
आने वाले चुनाव मे सरकार की छवि को धूमिल करता एक अधिकारी
आदिवासी समाज के हितो की बात करने वाले जननेता एवं प्रदेश मुखिया की और इसारा करती ये ख़बर……
झाबुआ ! आदिवासी बाहुल जिले के उप पंजीयक कार्यालय झाबुआ में करप्शन से कट रही जिले के ग्रामीण किसानो की जेब जोरों शोरों से चल रहा है बताया जाता है रजिस्ट्री करवाने आने वाले भोले भाले आदिवासियों से अतिरिक्त रूपया एठ कर करप्शन का व्यापार फल फुल रहा है जो राज्य की शिवराज सरकार की छवि धूमिल करती दिखाई दे रही है
रजिस्ट्री करवाने आए क्षेत्रीय किसान तथा नागरिक भारी परेशानी में है जब क्षेत्रीय किसान तथा अन्य नागरिक अपने खेत, प्लाट या मकान की रजिस्ट्री करवाने जाते हैं तो बिना लेनदेन के उनकी रजिस्ट्री नहीं हो पाती लेन-देन भी 1000-2000 हजार का नहीं बल्कि पूरे 1% के हिसाब से लिया जा रहा है
सुविधा शुल्क के नाम पर क्षेत्र की भोली-भाली जनता से उक्त उप पंजीयक द्वारा प्रतिदिन हजारों रुपए की लूट की जा रही है इससे लोग काफी परेशान है
उप पंजीयक झाबुआ में चल रहे गड़बड़ घोटाले की वजह से शासन के हजारों रुपए के स्टांप की चोरी की जा रही है
क्या इस लेनदेन की परछाई तक जिला पंजीयक अमरेश नायडू पहुंच पाएंगे?
क्या इसका पूर्ण रूप से खुलासा हो पाएगा यह एक गंभीर चुनौती का विषय है
क्योंकि एक मछली पूरे तालाब को गंदा करती है क्या इस कहावत का अर्थ झाबुआ के उप पंजीयक कार्यालय से जुड़ा हुआ है? सभी को ज्ञात है कि उप पंजीयक अधिकारी यहाँ पांच-छह सालो से ज्यादा समय से कुर्सी पर जमे हुए है ओर पिछले 1 साल 6 माह पहले से झाबुआ जिले की झाबुआ तहसील में उप पंजीयक कार्यालय का कार्य संभाल
रहे है उसके पहले यह झाबुआ जिले की पेटलावद तहसील में पदस्थ थे अब यह झाबुआ और पेटलावद दोनों जगहों पर यह स्वयं ही रजिस्ट्री का दाइत्व संभाल रहे हैं
कुछ समय पूर्व इस अधिकारी के तबादले का फरमान होने पर भी इनका रिलीव नहीं होना कई प्रश्न खड़े कर चुका है इसके विपरीत मेघनगर तहसील में 2 वर्षो से उप पंजीयक के पद पर पदस्थ अनुराधा राठौर के तबादले के साथ तत्काल रिलीव भी कर दिया गया
तत्कालीन कलेक्टर तन्वी हुड्डा को इस मामले मे संज्ञान लेना चाहिए कि राजस्व के इस विभाग में यह उप पंजीयक अधिकारी की कार्यशेली कैसी है?
सरकार के नुमाइंदो को भी अपने आला कमान तक ऐसे अधिकारी का लेखा जोखा पहुंचना चाहिये ताकी आदिवासी समाज के हितो की बात करने वाले जननेता का वजन समाज मे बढ़े






