पूज्य संयत मुनि जी ने प्रवचन में कहा यह कोई देव गति से आया पुण्य आत्मा है
विकास वाजपाई

आठ वर्षीय बालक ने आठ दिन जिया साधु जीवन
झाबुआ ! (विकास वाजपाई)
आत्मोद्धार चातुर्मास में धर्मदास गण नायक पूज्य प्रवर्तक देव जिनेंद्र मुनि जी अणु वत्स संयतमुनिजी का यह सफल वर्षावास कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा है। इस वर्षावास में बड़ो के साथ ही बच्चों ने भी गुरुभगवंतों के सान्निध्य में धर्म प्रभावना की है। नगर का रहने वाला आठ वर्षीय बालक अमय काकरिया जिसने पूज्य प्रवर्तक के चातुर्मास में सिद्ध भक्ति तप, 25 दिन 8 द्रव्य, चोविहार से पूर्ण किया।
गुरुभक्त ने उससे कहा इतने छोटे होते हुए आपने छः काय की है। मेरी इच्छा आपको उपहार देने की है। आपको क्या उपहार दिया जाए। तब अमय ने उन्हें कहा कि मुझे पात्र चाहिए उसे सुनकर वह बहुत ही प्रसन्न हुए और पूज्य संयतमुनिजी को सारा वृत्तांत बताया। पूज्य संयत मुनि जी ने प्रवचन में कहा कि यह कोई देव गति से आया पुण्य आत्मा है, पुण्य जीव है जिसके संस्कार और जिसके पूर्व भव के संस्कार के कारण इसने चॉकलेट, मोबाइल आदि की मांग ना करते हुए पात्र की मांग की है। इसी के चलते झाबुआ श्री संघ की और से सभा में उपस्थित दीक्षार्थी अंचल ने अमय को पात्र भेंट किए, यह वह पात्र है। जिसमे जैन मुनि अपने आहार के लिए गोचरी लेकर आते हैं। अमय ने उसी दिन पात्र में गोचरी लाकर भोजन किया। अमय के इस कार्य को समाज के सभी सदस्यों ने खूब सराहा और मंगल कामना की।
एकासन का तेला और भी कई छोटे-बड़े पच्चखान लिए, प्रतिक्रमण कंठस्थ किया, लगभग 8 गोचरी दयाकी, जैन मुनिराज की तरह एक दिन साधु जीवन जीना इसे गोचरी दया कहते हैं। इस के साथ ही बहुत सारे रात्रि संवर किए






