त्रिशला नन्दन वीर की जय बोलो महावीर…. से गुंजायमान हुआ अणु स्वाध्याय भवन
जयेश झामर

मेघनगर! जिनशासन गौरव आचार्य श्री उमेशमुनिजी की शिष्या एवं प्रवर्तक श्री जिनेन्द्रमुनिजी की आज्ञानुवर्तिनी विदुषी पूज्या मुक्तिप्रभाजी म.सा. ने पयूर्षण पर्व के पांचवे दिवस अणु स्वाध्याय भवन पर विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि पाप छिपाने से छिपता नहीं है फिर भी कोई छिपाने का प्रयास करता है लेकिन वह कर्मसत्ता से छिपने वाला नहीं है ।रुई के ढेर में छोटी सी चिंगारी छुपाई जाए तो रुई का पूरा ढेर जलकर नष्ट हो जाता है ।पापी कहलाना अच्छा नहीं लगता है लेकिन पाप छोड़ना नहीं चाहते है। । अगर पाप करने वाला पाप करके उसे प्रकट कर देता है तो उसको शांति का अनुभव होता है और उसके कर्मबंध प्रदेश प्रकृति स्थिति में आदि में कमी आती है । कर्म सत्ता की कोर्ट में निर्दोष को सजा नहीं होती है और दोषी छूट नही सकते है । प्रश्नमंच का आयोजन प्रवचन के बाद हुआ। प्रवचन की प्रभावना पंकज वागरेचा परिवार की ओर से रखी गई।
दोपहर में महावीर जन्म वांचन किया गया महासती शमप्रभाजी एवं प्रशमप्रभाजी ने भगवान महावीर के पूर्व भव को विस्तार से बताया। महावीर स्वामी की जय जयकार …..एवं त्रिशला नन्दन वीर की जय बोलो महावीर की… के जयघोष से स्वाध्याय भवन गुंज उठा । दोपहर प्रभावना मांगीलाल दिलीप कुमार खेमसरा द्वारा वितरित की गई।





