तत्वज्ञश्री धर्मेंद्रमुनिजी का रविवार को पुण्यशीलाजी का सोमवार को मेघनगर में हुआ मंगल प्रवेश
रितिक शर्मा/जयेश झामर

मेघनगर। आचार्यश्री उमेशमुनिजी के सुशिष्य प्रवर्तकश्री जिनेंद्रमुनिजी के आज्ञानुवर्ती तत्वज्ञश्री धर्मेंद्रमुनिजी, रविमुनिजी, प्रशस्तमुनिजी, प्रसन्नमुनिजी ठाणा 4 का रविवार को एवं साध्वीश्री पुण्यशीलाजी आदि ठाणा 6 का सोमवार को मेघनगर में मंगल प्रवेश हुआ। मुनि मंडल का रतलाम, करवड़, पेटलावद, रायपुरिया, कल्याणपुरा, झाबुआ आदि क्षेत्रों में धर्म प्रभावना करने के पश्चात यहां पदार्पण हुआ। वहीं साध्वी मंडल का दसई, राजगढ, कालीदेवी, झाबुआ आदि क्षेत्रों में धर्म प्रभावना करने के पश्चात यहां पदार्पण हुआ।
जयकारों से गगन गुंजायमान हो गया
मंगल प्रवेश यात्रा के दौरान श्रावक – श्राविकाएँ व बच्चें श्रमण भगवान महावीर स्वामी, आचार्यश्री उमेशमुनिजी, प्रवर्तकश्री जिनेंद्रमुनिजी, तत्वज्ञ श्री धर्मेंद्रमुनिजी की जय जयकार और गुरु गुणगान करते हुए चल रहे थे। इस दौरान मानो ऐसा प्रतीत हो रहा था कि गगन गुंजायमान हो गया। मंगल प्रवेश यात्रा विभिन्न मार्गो से होती हुई बस स्टेण्ड स्थित अणु स्वाध्याय भवन पर पहुँची। वहीं साध्वीश्री पुण्यशीलाजी आदि ठाणा 6 का जयकारों जे साथ मंगलवार पदार्पण महावीर भवन पर हुआ। श्रावक – श्राविकाओ ने मुनि मंडल व साध्वी मंडल को सामूहिक वंदना कर विहार की सुखसाता पूछी एवं तत्वज्ञश्री धर्मेंद्रमुनिजी व साध्वीश्री पुण्यशीलाजी के मुखारविंद से मांगलिक श्रवण की। मंगल प्रवेश के साथ ही मुनिमंडल व साध्वी मंंडल के सानिध्य में यहाँ प्रातः राई प्रतिक्रमण, प्रार्थना, दोपहर में वाचनी, ज्ञानचर्चा, शाम को देवसीय प्रतिक्रमण आदि विविध आराधनाएं हो रही है। जिसमें श्रावक – श्राविकाएँ व बच्चें उत्साहपूर्वक आराधना करने का लाभ ले रहे है। संयमी आत्माओं के मिले सानिध्य के इस सुनहरे अवसर का लाभ उठाने के लिए सभी आराधना में रम गए है। नगर में संत व साध्वी मंडल के विराजने से श्रावक – श्राविकाओं व बच्चों मे जबरदस्त उत्साह दिखाई दे रहा है।
अणु स्वाध्याय भवन पर हो रहे है व्याख्यान
तत्वज्ञश्री धर्मेंद्रमुनिजी, मुनिमंडल व साध्वी मंडल के व्याख्यान स्थानीय बस स्टैंड स्थित अणु स्वाध्याय भवन पर प्रतिदिन प्रातः 9 से 10 बजे तक हो रहे हैं। मुनि मंडल व साध्वी मंडल के मिले सानिध्य का पूरा पूरा लाभ लेने का श्रीसंघ ने समस्त श्रावक – श्राविकाओं से अनुरोध किया हैं।





