इस संसार में बेईमानी ईमानदारी के नाम से बेची जाती है-पुज्य संयतमुनिजी
रितिक शर्मा/जयेश झामर

धर्म चक्र आराधक शांता बहन भंडारी एवं वर्धमान ओली तप तपस्वी पंकज वागरेचा ने किया पारणा
मेघनगर!संसार में मुख्यतः दो प्रकार के दुःख है दुःख है कोई हमे कटु वचन कहे तो हमारी शारीरिक हानि तो कुछ नही होती परन्तु मानसिक दुःख बड़ जाता है झूठ भी इस संसार में सच के नाम से बिकता है इस लिये जिनेश्वर भगवान ने इस संसार को छोड़ने की बात कही है अगर मोक्ष प्राप्त करना है तो संयम लेना पड़ेगा सुख के भ्रम में पाप कमाये इसी को संसार कहते है रविवार विशेष प्रवचन के माध्यम से पूज्य संयतमुनिजी ने बताया एक आँख में ख़ुशी एक आँख में गम इसे ही संसार कहते है
आज धर्म चक्र तपश्वि का बहुमान तपश्वि निलमजी झामर ने 8 उपवास की बोली लेकर किया श्री संघ की ओर से शाल, माला ओर भेट देकर आप का बहुमान किया।
पंकज जी वागरेचा की तपश्या पूर्ण होने पर तपस्वी कमलेश जी भंडारी ने 25 उपवास ओर रविजी सुराणा ने 3 उपवास की बोली लेकर बहुमान किया संघ की ओर से शाल, माला, ओर भेट देकर बहुमान किया।
प्रभावना पंकज जी की तपस्या पर हसमुखलालजी मिश्रीमल जी वागरेचा परिवार द्वारा वितरित की गई।
सामूहिक एकासन का आयोजन एवम आतिथ्य सत्कार का लाभ सुरेशचंद्रजी, रिंकुजी, जैकी जैन परिवार ने लाभ लिया।
आज करीब 130 एकासन तप की आराधना हुई।
तपस्या पर वागरेचा परिवार द्वारा 11000 जीवदया में दान की घोषणा की। रविवार लिमडी, रतलाम झाबुआ,कल्याणपुरा, बदनावर खवासा कई श्री संघ से श्रावक, श्राविका दर्शन, वंदन हेतु पधारे।
कार्यक्रम का संचालन विपुल धोका ने किया






