अणु गुरु द्वारा रचित साहित्य को जन जन तक पहुंचने का कार्य कर रही दिशा वागरेचा
जयेश झामर


दिशा पंकज वागरेचा
साहित्य समिति द्वारा ‘व्हाटसअप केटलाग पढे, पढाएं और आर्डर करे सेवा का शुभारंभ
मेघनगर। ज्ञान रूपी अमृत से साराबोर साहित्यीक पुस्तको का प्रकाशन कर उसे देश विदेश के कोने कोने में बसे श्रद्धालुओं तक पंहुचाने वाली नगर से संचालीत पुज्य श्री नंदाचार्य साहित्य समिति द्वारा ज्ञान पंचमी के विशेष अवसर पर पुस्तको की सुगमता से खरीदी करने हेतु एक विशेष व्हाटसअप सेवा का शुभारंभ किया गया। जिसमें श्रद्धालु समिति के नंबर को अपने फोन मे सेव कर इस सुविधा से घर बैठे श्रुत साहित्य पढ भी सकते है व उसे आर्डर कर मंगवा भी सकते है। समिति के डिजिटलीकरण की ओर बढते कदम के रूप मे इस सुविधा को ‘व्हाटसअप केटलाग पढे, पढाएं और आर्डर करे’ नाम दिया गया है।
अब ऐसे घर बैठे मंगवा पाएंगे किताबे
इस सुविधा के लिए सबसे पहले आपको समिति का आधिकारीक मोबाईल नंबर 7000576399 अपने मोबाईल फोन में सेव कर इस नंबर पर Hi का मेसेज करना होगा। यह मेसेज जाते ही समिति की ओर से पुस्तक खरीदी करने हेतु आवश्यक दिशा निर्देश से जुडा मेसेज तुरंत आपको प्राप्त हो जाएगा। इसमें आगे दिखाए जाने वाले केटलाग पर जाते ही समिति द्वारा प्रकाशित पुस्तको का संग्रह आपको दिखाई देगा। यदि आप किसी किताब को पढना चाहते है तो उस पर दिखाई जा रही लिंक को खोल कर पढ सकते है व यदि आप इसे खरीदना चाहते है तो उसे प्लस पर क्लीक कर खरीदी के लिए चयन कर सकते है। जैसे ही आप खरीदी के लिए चयन की प्रक्रिया को पूर्ण करेगे आपके द्वारा चयनित पुस्तकों की जानकारी समिति तक पंहुच जाएगी। उसके बाद समिति द्वारा आपको एक मेसेज आएगा जिसमें आप अपना नाम, मोबाईल नंबर व पता लिखकर भेज देंगे, इस मेसेज में किताबों का भूगतान करने की लिंक भी रहेगी। जिसके बाद समिति आप तक आपके द्वारा आर्डर की गई पुस्तके भेज देगी।
दिशा के प्रयास दे रहे समिति को नई दिशा
समिति के अध्यक्ष देवेन्द्र गादिया ने बताया कि आज से करीब चार वर्ष पूर्व समिति द्वारा प्रकाशीत पुस्तकों के मोबाईल में पठन के लिए डिजीटल लाईब्रेरी भी बनाई गई थी। जिससें हर व्यक्ति इन पुस्तकों को कंही भी पढ सकता था। पहले डिजीटल लाईब्रेरी व अब ‘व्हाटसअप केटलाग पढे, पढाएं और आर्डर करे’ इन दोनो ही कार्यो के लिए नगर की होनहार दिशा पंकज वागरेचा ने अथक प्रयास कर ये सुविधाएं समाज के लिए निशुल्क रूप से उपलब्ध करवाई। समिति के डिजिटलीकरण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा कर दिशा ने दोनो डिजीटल प्लेटफार्म से समिति का कार्य सुगम कर दिया है। जिसके लिए समिति दिशा के प्रयासो की खुब खुब प्रशंसा कर अनुमोदना करती है। इन एप के माध्यम से समिति द्वारा प्रकाशीत पुस्तको को सुगमता से पढना व इसे आर्डर कर बुलवाना हर किसी के लिए आसान हो जाएगा।
समाज के हर वर्ग को प्रभावीत करती पुस्तके
पुज्य श्री नंदाचार्य साहित्य समिति की स्थापना वर्ष 1986 में आचार्य भंगवत पुज्य गुरूदेव श्री उमेशमुनि जी म.सा. ‘अणु’ की प्रेरणा से हुई थी। जिसका प्रमुख उददेश्य संत सतियों द्वारा रचित साहित्य का प्रकाशन कर ज्ञार्नाजन हेतु जन जन तक पंहुचाने के लिए किया गया था। बहुत ही लघु स्वरूप में हुई शुरूवात के बाद समय के साथ संस्था का कार्य व गतिविधीयां सतत बढती रही। तब से अब तक समिति द्वारा करीब 75 किताबे प्रकाशीत की जा चुंकी है। जिनकी श्रद्धालुओं व पाठकों के बिच निरंतर मांग बनी रहती है। इन पुस्तकों के माध्यम से बच्चों में अच्छे संस्कारों सृजन हुआ, युवा पीढी ने धर्म के रास्ते पर चलकर सफलताएं प्राप्त की, वृद्धजनों ने भी साहित्य को अपने जीवन में उतारकर अपना जीवन सफल बनाया। वंही समय समय पर इस पुस्तकों के माध्यम से कई ज्ञानवर्धक प्रतियोंगिताओं का भी आयोजन होता रहता है।
समाज के लिए समय निकालना प्रेरणादायक
समिति को नई दिशा देने के प्रयासो में लगी दिशा के पिता व समिति के प्रमुख व्यवस्थापक पंकज वागरेचा से जब इस बारे में बात करो तो वे बडे गर्व से अपनी बिटीयां के प्रयासो का उल्लेख करते है। श्री वागरेचा बताते है कि दिशा एक निजी कंपनी में कार्यरत है और बेहद व्यस्त रहती है उसके बाद भी अपने समाज के लिए, साहित्य संस्था के लिए समय निकालना प्रेरणादायक है। मैने एक बार सिर्फ यह सोचा था कि अधिकांश लोग व वर्तमान पीढी अपना ज्यादा से ज्यादा समय मोबाईल पर बिताने लगी है जिससे ऐसा कुछ किया जाए कि आचार्य श्री द्वारा रचित साहित्य सभी को मोबाईल पर सुगमता से उपलब्ध हो। इस पर दिशा वागरेचा ने अपने कार्य से बचे हुए समय व छुटटीयों का उपयोग कर दिन रात अथक परिश्रम से डिजीटल लाईब्रेरी बनाई इसके बाद अब व्हाटसअप केटलाग बनाए जाने से अब देश विदेश के कोने कोने से इन किताबो को खरीदना आसान हो जाएगा। दिशा के इन प्रयासों ने मुझे गर्व की अनुभूति करवाई है।





