
कोरोना जैसी महामारी मे प्रशासन ने जिनका सहयोग लिया ऐसे निजी आयुष चिकित्सको का क्या??
मेघनगर!(जयेश झामर) ग्रामीण बाहुल्यता वाला झाबुआ जिला जहाँ दैनिक मजदूरी करके अपना जीवन यापन करने वाले भाई बहनो की मात्रा अधिक है धनराशि की पर्याप्ता नही होने से पड़ोसी प्रदेश गुजरात जाकर मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करते है स्वास्थ सम्बन्धी परेशानिया होने पर ज्यादा खर्च वहन ना करने की दशा मे..
ऐसे में उन्हें संभालने वाले
उन्हें कम से कम खर्च में स्वस्थ करने वाले..
झाबुआ जिले की स्वास्थ्य सेवा की *रीढ़ की हड्डी आयुष चिकित्सक
चाहे कोरोना का समय हो चाहे कोई भी इमरजेंसी (पेटलावद ब्लास्ट,आदि) हो ये निजी चिकित्सक सरकार के कंधे से कंधा मिलाते हुए खड़े रहते है यहाँ तक अपना जीवन तक दांव पर लगा देते है ऐसे मे अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए कई चिकित्सको ने कोरोना महामारी मे जान भी गवाई
ऐसे ये देवदूत आज झोलाछाप शब्द सुन सुनकर स्वयं को प्रताड़ित महसूस कर रहे है जबकि स्पष्ट फरमान है कि जो बिना किसी वैध डिग्री के चिकित्सा कर रहे है जो सही मायनों में घातक है और मरीजो की जान से खिलवाड़ कर रहे है उन्हें बंद करवाया जाए जो की संख्या में भी काफी मात्रा में है इनके बजाय अगर अधिकारियों द्वारा आयुष चिकित्सको को परेशान किया जाता है तो जिले की स्वास्थ व्यवस्थाओ पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है जबकी वर्तमान मे जिलेभर मे वाइरल बुखार के प्रकोप के चलते शासकीय डाक्टरो की सिमित संख्या के बीच अगर निजी आयुष चिकित्सक अपनी सेवा देना बंद कर दे..तो जिलेभर मे सिर्फ आधे दिन में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा जाये






