
मेघनगर-कृष्ण महाराज का जन्म विपरीत परिस्थिति में हुआ। पुण्य का प्रभाव था। बंधन खुल गए। कारावास के सभी दरवाजे खुल गए। तालाब ने रास्ता दिया। उनके जन्मदिवस की कई विशेषताएं थी जो सामान्य व्यक्ति में नहीं होती। पुण्यवान आत्मा के जन्म दिवस से बहुत सारी शिक्षा ग्रहण कर सकते हैं। वे पुण्यशाली थे और पुरुषार्थी थे। उनकी पाठशाला जंगल में थी। तीन खंड के राजा थे। गुण को ग्रहण करने वाले राजा थे। अभिमानी नहीं थे नीतिवान थे। कौरव और पांडवों के युद्ध के पूर्व शांति प्रस्ताव लेकर गए थे। युद्ध ना हो, लेकिन दुर्योधन के अहंकार व घमंड के कारण युद्ध हुआ। अंत में कौरवों की पराजय हुई। उक्त्त उद्गार अणु स्वाध्याय भवन में जन्माष्टमी पर्व पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए संयत मुनि जी ने कहा कृष्ण सुदामा का वृतांत सुनाते हुए कहा अपने मित्र की परिस्थिति खराब होने के कारण वे स्वयं द्वार पर चलकर आए। अपने मित्र के पांव अपने अश्रुओं से धोएं। यह उनकी मित्रता की मिसाल थी। आज मित्र व रिश्तेदार विपरीत परिस्थिति में हो तो इंसान मुंह फेर लेता है। छोटे से छोटे व्यक्ति को सम्मान दिया। कृष्ण महाराज के गुणों को जीवन में उतारना जरूरी है।
तप चक्रेश्वरी श्रीमती स्नेहलता बहन वागरेचा 70 उपवास सहित 81 सिद्धितप, वर्षीतप, एकासना ,बियसना, आयम्बिल, तप के तपस्वियों ने प्रत्याख्यान लिए। बुधवार को मासक्षमण के तपस्वी मुकेश ललवानी के निवास से वरघोडा प्रारंभ हुआ। श्री शांति सुमतिनाथ मंदिर, श्री गौडी जी पारसनाथ मंदिर, राजेंद्र सूरी ज्ञान मंदिर में दर्शन वंदन पश्चात जुलूस अणु स्वाध्याय भवन पहुंचा। पूज्य संयत मुनि जी म. सा. ने तप के बारे में विस्तार से अनुमोदना करते हुए कहा पूर्व वर्षों में भी मुकेश भाई नो,आठ, ग्यारह 26 उपवास कर चुके हैं। मासक्षमण की तपस्या उन्होंने पूर्ण की है। उनका पूरा परिवार धर्म आराधना में तत्पर है।
तपस्वी श्री ललवानी का बहुमान तप की बोली लेकर अरविंद धोका 7 उपवास, रेखा ललवानी 8 उपवास, एवं सिद्धी तप के तपस्वी रवि सुराणा, जिनेन्द्र बाफना ने श्री संघ की ओर से बहुमान किया। प्रभावना का लाभ ललवानी परिवार ने लिया। संचालन विपुल धोका ने किया।





